आज की ताजा लाइव खबरें: NEET प्रदर्शनकारियों के डेटा संरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का निर्देश, संसद में पेपर लीक विरोधी बिल पर बहस और दिल्ली में ‘लक्ष्मी योजना’ मंजूर

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08:35 AM IST | बुधवार, 29 जुलाई 2026 | इंडिया प्राइम नेशनल डेस्क नई दिल्ली : तमिलनाडु भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (DVAC) द्वारा वरिष्ठ राजनेता और पूर्व मंत्री वी. सेंथिल बालाजी तथा उनके करीबियों के खिलाफ लगातार कड़ी कार्रवाई की जा रही है। हाल ही में इस विभाग ने तमिलनाडु के करूर में सेंथिल बालाजी के बेहद करीबी सहयोगियों और दोस्तों के आवासों पर सुबह-सुबह छापेमारी और सघन तलाशी अभियान चलाया है।

भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो की इस कार्रवाई के अलावा, सेंथिल बालाजी पर टीवीके पार्टी के एक विधायक को ₹35 करोड़ की रिश्वत की पेशकश कर सरकार को अस्थिर करने की साजिश रचने का भी आरोप लगा है, जिसमें मद्रास हाई कोर्ट ने उन्हें हाल ही में शर्तों के साथ अग्रिम जमानत दी है।

इस बीच, सेंथिल बालाजी और उनके भाई वी. अशोक कुमार ने मद्रास हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो और पुलिस पर जांच के बहाने उन्हें परेशान करने का आरोप लगाया था। उन्होंने अदालत से मांग की थी कि जांच एजेंसियों को उनके खिलाफ इस तरह की प्रताड़ना से रोका जाए, लेकिन हाई कोर्ट ने इस याचिका को समय से पहले बताते हुए खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि पुलिस और भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो को मामलों की निष्पक्ष व कानूनी जांच करने का पूरा अधिकार है और इसमें दखल नहीं दिया जा सकता।
इसके अतिरिक्त, सेंथिल बालाजी के बिजली मंत्री रहते हुए हुए कथित ₹397 करोड़ के ट्रांसफार्मर टेंडर घोटाले की जांच को मद्रास उच्च न्यायालय ने राज्य के भ्रष्टाचार विरोधी निदेशालय (DVAC) से लेकर सीबीआई (CBI) को सौंप दिया है।
अदालत ने डीवीएसी को इस मामले से जुड़े सभी रिकॉर्ड तुरंत सीबीआई के हवाले करने के निर्देश दिए थे। ‘कैश फॉर जॉब’ (नौकरी के बदले नकद) घोटाले में लंबे समय तक जेल में रहने और जमानत पर बाहर आने के बाद भी, सेंथिल बालाजी अलग-अलग राज्य और केंद्रीय जांच एजेंसियों के रडार पर बने हुए हैं।

 

08:05 AM IST | मंगलवार, 29 जुलाई 2026 | इंडिया प्राइम नेशनल डेस्क नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने नीट (NEET) परीक्षा की अनियमितताओं और छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अहम निर्देश जारी किए हैं।

अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करना लोकतंत्र का एक अभिन्न हिस्सा है। इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों की पुलिस को यह कड़े निर्देश दिए हैं कि छात्र प्रदर्शनकारियों से जुटाए गए किसी भी डिजिटल डेटा को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाए और उसे किसी भी स्थिति में सार्वजनिक डोमेन (Public Domain) से दूर रखा जाए ताकि उनकी गोपनीयता बनी रहे।

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