Sariska Tiger Model कैसे उजड़ चुके जंगल में फिर गूंजी बाघों की दहाड़? 18 साल पूरे होने पर राष्ट्रीय सेमिनार में दुनिया को दिखा भारत का Conservation Blueprint

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तेजस्वी सिंह | इंडिया प्राइम रिसर्च. Sariska Tiger Model  28 जून 2026, भारतीय वन्यजीव संरक्षण के इतिहास का महत्वपूर्ण दिन है। सरिस्का टाइगर रिजर्व में Tiger Reintroduction Project के 18 वर्ष पूरे होने के अवसर पर राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया गया । इसका उद्घाटन केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव तथा राजस्थान के वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री संजय शर्मा ने किया।सेमिनार का उद्देश्य केवल 18 वर्षों की सफलता का उत्सव मनाना नहीं, बल्कि भारत के भविष्य के Tiger Conservation Roadmap को तैयार करना है।

सेमिनार में भाग लेने वाले प्रमुख अधिकारी—

  • NTCA के महानिदेशक सुशील अवस्थी
  • अतिरिक्त महानिदेशक (वन) संजय कुमार
  • इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस (IBCA) के महानिदेशक एस.पी. यादव
  • 11 राज्यों के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक (Chief Wildlife Wardens)
  • 20 से अधिक टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर
  • वरिष्ठ IFS अधिकारी
  • भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के विशेषज्ञ
  • वैज्ञानिक, संरक्षण जीवविज्ञानी एवं वन प्रबंधन विशेषज्ञ

सरिस्का मॉडल को सफल बनाने वाले असली नायक

सरिस्का की सफलता किसी एक अधिकारी या संस्था की नहीं बल्कि सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। इन संस्थाओं ने वैज्ञानिक आधार पर पुनर्वास योजना तैयार की।

नीति निर्माण

  • भारत सरकार
  • राजस्थान सरकार
  • NTCA
  • राजस्थान वन विभाग
  • Wildlife Institute of India (WII)
  • International Big Cat Alliance (IBCA)

प्रशासनिक नेतृत्व

राजस्थान वन एवं पर्यावरण विभाग (Forest, Environment and Climate Change Department) के शीर्ष प्रशासनिक ढांचे में आईएएस (IAS) अधिकारी नीति-निर्माण और शासन स्तर की जिम्मेदारी संभालते हैं, जबकि आईएफएस (IFS/IFoS – भारतीय वन सेवा) अधिकारी तकनीकी रूप से वन और वन्यजीव प्रबंधन का नेतृत्व करते हैं.

वन विभाग में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख (PCCF & HoFF): यह राजस्थान वन विभाग के सर्वोच्च तकनीकी प्रमुख होते हैं । वर्तमान में अरिजीत बनर्जी (IFS): यह राजस्थान वन विभाग के सबसे बड़े तकनीकी अधिकारी हैं।  पवन कुमार उपाध्याय है अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (APCCF – वन्यजीव) एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक (Chief Wildlife Warden – CWLW) , राज्य के सभी राष्ट्रीय उद्यानों और बाघ परियोजनाओं के मुख्य प्रभारी,  राजेश कुमार गुप्ता (IFS): अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (APCCF – प्रशासन एवं प्रशिक्षण) ,  उदय शंकर (IFS): अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (APCCF) एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) कैम्पा (CAMPA), अतिरिक्त प्रभार: APCCF (निगरानी एवं मूल्यांकन) और वन सुरक्षा ,प्रबंध निदेशक (MD), RSFDCL:, राजस्थान राज्य वन विकास निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक, जिनके पास अतिरिक्त प्रभार के रूप में APCCF (श्रम एवं कानून) की भी जिम्मेदारी है  सरिस्का टाइगर मॉडल को सफल बनाने में उपरोक्त अधिकारियों की अहम भुमिका रही है

  • अवैध खनन पर कार्रवाई
  • गांवों का पुनर्वास
  • बजट एवं संसाधनों की व्यवस्था
  • वैज्ञानिक मॉनिटरिंग
  • बाघों के स्थानांतरण की रणनीति  को सफलतापूर्वक लागू किया।

ग्राउंड स्टाफ

सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई—

  • Forest Guards
  • Rangers
  • Field Biologists
  • Veterinary Teams
  • Camera Trap Monitoring Teams
  • स्थानीय ग्रामीणों एवं ईको-डेवलपमेंट समितियों ने दिन-रात जंगल में रहकर बाघों की सुरक्षा सुनिश्चित की।

आखिर क्या है “सरिस्का मॉडल”?

सरिस्का मॉडल केवल बाघों को एक जंगल से दूसरे जंगल में ले जाने का नाम नहीं है। यह चार स्तंभों पर आधारित संरक्षण प्रणाली है .आज जिस सरिस्का की सफलता का जश्न मनाया जा रहा है, वह कभी देश के सबसे बड़े वन्यजीव संकट का प्रतीक बन चुका था।वर्ष 2004-05 में लगातार अवैध शिकार (Poaching) के कारण सरिस्का के सभी बाघ समाप्त हो गए।पूरे देश में यह खबर चिंता का विषय बन गई। तब भारत सरकार, राजस्थान सरकार, NTCA, वन विभाग और वैज्ञानिक संस्थानों ने मिलकर इतिहास रचने का निर्णय लिया।

28 जून 2008: जब हेलीकॉप्टर से पहुंचे पहले बाघ

28 जून 2008 को रणथंभौर टाइगर रिजर्व से एक बाघ को हेलीकॉप्टर द्वारा सरिस्का लाया गया।इसके बाद क्रमशः अन्य बाघ और बाघिनों का स्थानांतरण किया गया। यह दुनिया का पहला सफल Tiger Reintroduction Program माना जाता है, जिसमें पूरी तरह समाप्त हो चुकी बाघ आबादी को दूसरे जंगल से स्थानांतरित कर पुनः स्थापित किया गया।

आज 53 से अधिक बाघों तक पहुंचा कुनबा

पिछले 18 वर्षों में सरिस्का ने अद्भुत सफलता हासिल की है।आज यहां—

  • लगभग 53 बाघ एवं शावक
  • कई नई टेरिटरी
  • नियमित प्रजनन
  • बेहतर मॉनिटरिंग
  • वैज्ञानिक संरक्षण व्यवस्था ने इसे भारत के सफलतम टाइगर लैंडस्केप में शामिल कर दिया है।

1. Scientific Tiger Reintroduction

रणथंभौर से बाघों का वैज्ञानिक चयन, रेडियो कॉलर, स्वास्थ्य परीक्षण और एयरलिफ्ट।

2. Habitat Restoration

जंगल का पुनर्जीवन, जल स्रोत, शिकार प्रजातियों की संख्या बढ़ाना तथा मानवीय दबाव कम करना।

3. Community Participation

ग्रामीणों का पुनर्वास, रोजगार, ईको-टूरिज्म तथा संरक्षण में स्थानीय भागीदारी।

4. Technology Driven Protection

AI, ड्रोन, कैमरा ट्रैप, GPS, Satellite Monitoring और डिजिटल पेट्रोलिंग।

दुनिया में सरिस्का मॉडल क्यों बना मिसाल?

2005 तक सरिस्का पूरी तरह बाघ विहीन हो चुका था। 28 जून 2008 को रणथंभौर से पहला बाघ हेलीकॉप्टर द्वारा लाया गया। आज—

  • लगभग 53 बाघ एवं शावक
  • तीसरी और चौथी पीढ़ी
  • नियमित प्रजनन
  • स्थिर आबादी . यह दुनिया का पहला व्यापक रूप से सफल Tiger Reintroduction उदाहरण माना जाता है।

दूसरे Tiger Reserves से कैसे अलग है सरिस्का?

सामान्य टाइगर रिजर्व सरिस्का मॉडल
प्राकृतिक जंगल कॉरिडोर लगभग आइसोलेटेड हैबिटैट
घने वन अरावली के शुष्क पर्णपाती वन
प्राकृतिक बाघ आबादी पूरी आबादी पुनर्स्थापित
सामान्य गश्त AI आधारित निगरानी
सीमित तकनीक Drone + Thermal + Satellite
पारंपरिक संरक्षण High-Tech Conservation

Sariska Tiger Model-indiaprimetvसरिस्का की भौगोलिक चुनौती

सरिस्का की सबसे बड़ी चुनौती है—

  • अरावली की पथरीली पहाड़ियां
  • शुष्क वन
  • मानव बस्तियां
  • धार्मिक स्थल
  • सीमित प्राकृतिक कॉरिडोर .इसी कारण यहां संरक्षण अन्य टाइगर रिजर्व की तुलना में कहीं अधिक जटिल माना जाता है।

भारत का पहला High-Tech Tiger Conservation Plan

सरिस्का का नया Conservation Plan आधुनिक तकनीक पर आधारित है।मुख्य विशेषताएं—

  • AI Camera Trap Grid
  • Thermal Surveillance
  • Drone Monitoring
  • GPS एवं Satellite Tracking
  • Real Time Control Room
  • Dedicated Tiger Monitoring Teams
  • Smart Patrol System
  • Wildlife Corridor Mapping
  • Human-Wildlife Conflict Management

“राजमाता ST-2” जिसने बदल दी सरिस्का की किस्मत

यदि सरिस्का की सफलता का कोई चेहरा है तो वह है बाघिन ST-2। 2010 में ST-1 की मृत्यु के बाद पूरा प्रोजेक्ट संकट में आ गया था। लेकिन ST-2 ने—

  • पहली सफल ब्रीडिंग की
  • दूसरी पीढ़ी तैयार की
  • तीसरी और चौथी पीढ़ी की नींव रखी ,इसी कारण उसे “सरिस्का की राजमाता” कहा जाता है।

भविष्य की दिशा

राष्ट्रीय सेमिनार में भविष्य के लिए जिन विषयों पर जोर दिया गया—

  • Wildlife Corridors
  • Climate Resilient Conservation
  • AI आधारित निगरानी
  • Genetic Diversity
  • Landscape Level Management
  • Community Based Conservation
  • Eco Tourism Management
  • High-Tech Wildlife Protection

निष्कर्ष

18 वर्ष पहले सरिस्का में शुरू हुआ प्रयोग आज वैश्विक संरक्षण मॉडल बन चुका है। यह केवल बाघों की वापसी नहीं, बल्कि विज्ञान, तकनीक, प्रशासनिक इच्छाशक्ति और जमीनी स्तर पर काम करने वाले वनकर्मियों के समन्वय की सफलता की कहानी है। आज “सरिस्का मॉडल” भारत के लिए ही नहीं, बल्कि उन सभी देशों के लिए एक Blueprint है जो अपनी लुप्तप्राय वन्यजीव प्रजातियों को पुनर्जीवित करना चाहते हैं।


FAQs

1. सरिस्का में टाइगर रीइंट्रोडक्शन कब शुरू हुआ?

28 जून 2008 को रणथंभौर से बाघों को एयरलिफ्ट कर सरिस्का लाया गया।

2. सरिस्का में वर्तमान में कितने बाघ हैं?

लगभग 53 बाघ एवं शावक।

3. सरिस्का मॉडल क्या है?

यह वैज्ञानिक पुनर्वास, आधुनिक तकनीक, स्थानीय समुदाय की भागीदारी और निरंतर मॉनिटरिंग पर आधारित संरक्षण प्रणाली है।

4. सरिस्का दुनिया में क्यों प्रसिद्ध है?

क्योंकि यह उन चुनिंदा सफल उदाहरणों में शामिल है जहां बाघ पूरी तरह समाप्त होने के बाद दोबारा स्थापित किए गए।

5. सरिस्का अन्य टाइगर रिजर्व से कैसे अलग है?

यह अरावली के शुष्क, आइसोलेटेड जंगल में स्थित है, जहां प्राकृतिक कॉरिडोर नहीं हैं और संरक्षण के लिए हाई-टेक तकनीकों का व्यापक उपयोग किया जाता है।

6. हाई-टेक कंजर्वेशन प्लान क्या है?

AI कैमरा ट्रैप, ड्रोन, थर्मल सर्विलांस, GPS ट्रैकिंग, सैटेलाइट मॉनिटरिंग और रियल-टाइम कंट्रोल सिस्टम पर आधारित आधुनिक संरक्षण योजना।

7. ST-2 को “सरिस्का की राजमाता” क्यों कहा जाता है?

क्योंकि उसने पहली सफल ब्रीडिंग कर सरिस्का में नई पीढ़ी के बाघों की नींव रखी।

8. राष्ट्रीय सेमिनार का मुख्य उद्देश्य क्या है?

18 वर्षों की सफलता की समीक्षा, भविष्य की संरक्षण नीति, हाई-टेक कंजर्वेशन मॉडल और राष्ट्रीय स्तर पर टाइगर संरक्षण की नई रणनीति तैयार करना।

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