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'कोई दोस्त ऐसा कैसे हो सकता है…', भारतीयों की मौत पर US के बयान से भड़के शशि थरूर – AajTak

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ओमान के पास समुद्र में एक आम व्यापारी जहाज था. उस पर 24 भारतीय नाविक काम कर रहे थे. अमेरिकी नौसेना ने उस पर हमला कर दिया. तीन भारतीय मारे गए. भारत ने कड़ा विरोध किया. अमेरिका ने माफी मांगने की जगह हेकड़ी दिखाई. और अब कांग्रेस नेता शशि थरूर ने सीधे सवाल पूछा है कि क्या भारतीयों की जान की कोई कीमत नहीं? उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि कोई दोस्त ऐसा कैसे बोल सकता है.
ओमान के समुद्री किनारे के पास एक जहाज था जिसका नाम था एमटी सेटेबेल्लो. यह कोई युद्धपोत नहीं था. यह एक आम व्यापारी जहाज था जो समुद्र में सामान ढो रहा था. इस जहाज पर पलाउ देश का झंडा लगा था. और इस पर काम करने वाले 24 नाविक भारतीय थे. 
अमेरिका ने होर्मुज की खाड़ी में नाकाबंदी कर रखी है. यानी अमेरिका ने तय किया है कि इस समुद्री रास्ते से कोई भी जहाज बिना उनकी इजाजत के नहीं गुजरेगा. अमेरिकी नौसेना का कहना था कि यह जहाज उनके आदेश को नहीं मान रहा था. इसी वजह से अमेरिकी नौसेना ने उस पर हमला कर दिया.
हमले के बाद 21 नाविकों को बचा लिया गया. लेकिन तीन नाविक लापता हो गए. बाद में पता चला कि वो तीनों मारे जा चुके थे.
शशि थरूर ने क्या कहा?
इस पूरे मामले पर कांग्रेस नेता शशि थरूर ने अमेरिका के रुख पर कड़ी आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि अमेरिका के आधिकारिक बयान में तीन भारतीय नागरिकों की मौत पर कोई दुख नहीं जताया गया, कोई माफी नहीं मांगी गई. थरूर ने पूछा कि जो देश भारत का दोस्त और रणनीतिक साझेदार है, वो इतना बेपरवाह कैसे हो सकता है.
Deeply shocking to read this official US statement, which contains absolutely no expression of regret or condolence for the loss of innocent Indian lives. How can a “friend” and strategic partner be so deeply insensitive?

Why couldn’t a non-compliant commercial vessel have been… pic.twitter.com/heUIOGuulG

यह भी पढ़ें: होर्मुज में 3 भारतीयों की मौत पर भड़के जयशंकर, तो अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दिखाई हेकड़ी

थरूर ने एक और अहम सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि अगर जहाज उनकी बात नहीं मान रहा था तो मिसाइल से हमला करना जरूरी था क्या. क्या जहाज के इंजन या उसकी दिशा को बिना किसी को मारे रोका नहीं जा सकता था. क्या बिना जान लिए जहाज को नहीं रोका जा सकता था.
थरूर ने एक बड़ी बात यह भी कही कि इन समुद्री रास्तों से गुजरने वाले लगभग हर व्यापारी जहाज पर भारतीय नाविक काम करते हैं. तो क्या अब वो सब अमेरिकी मिसाइलों के निशाने पर हैं. थरूर ने उम्मीद जताई कि जयशंकर ने रुबियो से बात में यह सब साफ-साफ कह दिया होगा.
जयशंकर और रुबियो के बीच क्या बातचीत हुआ?
घटना के बाद भारत ने कड़ा विरोध दर्ज कराया था. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से बातचीत कर भारत की नाराजगी जाहिर की. जयशंकर ने कहा था कि आम व्यापारी जहाजों पर इस तरह की घातक कार्रवाई स्वीकार नहीं की जा सकती. इसे लेकर एक्स पर पोस्ट भी किया.
इसके बाद शनिवार को रूबियो ने भी जयशंकर से संपर्क किया. बातचीत के दौरान अमेरिका ने स्पष्ट किया कि वह होर्मुज क्षेत्र में अपनी नाकाबंदी के उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं करेगा. इस बयान को अमेरिका के सख्त रुख के तौर पर देखा जा रहा है.
घटना के बाद सबसे पहले भारत ने नई दिल्ली में अमेरिकी कार्यवाहक राजदूत को तलब कर विरोध दर्ज कराया था. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि भारतीय नाविकों वाले जहाजों पर हमले तुरंत बंद होने चाहिए और क्षेत्र में शांति का रास्ता केवल बातचीत और कूटनीति से ही निकल सकता है.
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IndiaPrime Hindi

Devender Singh is a senior journalist and media professional with over two decades of experience in television, digital, and Hindi-language journalism. He began his career with ETV Hindi in 2000 and has since served as Bureau Chief for several prominent news networks, including India News, Sahara Samay, and Bharat Express. Throughout his career, he has reported on several high-impact stories, including tribal starvation deaths, the Asaram case, the Jaipur serial bomb blasts, and numerous crime, political, and social issues that earned him recognition as a credible and influential journalist across India. Beyond television journalism, Devender Singh has contributed significantly to digital media transformation, Hindi journalism innovation, and AI-driven Hindi language initiatives. He has also served as a media and communication advisor to several prominent individuals, organizations, and institutions. Holding a postgraduate degree in Journalism along with a degree in Law, he continues to write and analyze issues related to governance, public policy, technology, politics, and social development, delivering insightful and fact-based content to readers.

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