आगजनी के पीड़ितों को मुआवजा व मृतकों के परिजनाें को मिले सरकारी नौकरी : भूपेन्द्र सिंह हुड्डा – Dainik Tribune
साथ ही जिन परिवारों ने इस अग्निकांड में अपनों को खोया है, उनको एक-एक सरकारी नौकरी देने की भी मांग की। हुड्डा ने कहा कि अगर अग्निशमन विभाग के पास पूरी व्यवस्था होती तो इस नुकसान को कम किया जा सकता था, लेकिन आज हालत ये है कि प्रदेश में 50 प्रतिशत फायरमेंस के पद खाली हैं। ढाई साल से उनकी भर्ती लटकी पड़ी है। गाड़ियों की हालत ऐसी है कि डी-पार्क में आग बुझाते हुए एक तो जाम हो गई, उसमें से पानी नहीं निकल सका। पहली गाड़ी का प्रेशर इतना कम था कि आग बुझाने के लिए नाकाफी था। दूसरी गाड़ी को आने में लगभग 50 मिनट लग गए। तबतक बहुत नुकसान हो चुका था।
हुड्डा ने कहा कि फायर स्टेशन को अब शहर से बाहर बना दिया गया है, जबकि जरूरी है कि शहर के भीतर भी एक स्टेशन होना चाहिए, ताकि आगजनी स्थल तक जल्दी से जल्दी सहायता पहुंच सके। उन्होंने कहा कि देशभर से लगातार आगजनी की खबरें आ रही हैं, जिनमें भयंकर जान माल का नुकसान हो रहा है। ऐसे में हरियाणा समेत तमाम सरकारों को सुनिश्चित करना चाहिए कि अग्निशमन विभाग पूरी तरह अलर्ट रहे और उनके पास वह तमाम उपकरण हों, जिनके जरिए दुर्गम से दुर्गम इलाकों में और जल्दी से जल्दी आग पर काबू पाया जा सके। इस मौके पर विधायक भारत भूषण बतरा, पूर्व मंत्री सुभाष बतरा और पूर्व विधायक आनंद सिंह दांगी भी मौजूद रहे।
दूरदृष्टा, जनचेतना के अग्रदूत, वैचारिक स्वतंत्रता के पुरोधा एवं समाजसेवी सरदार दयालसिंह मजीठिया ने 2 फरवरी, 1881 को लाहौर (अब पाकिस्तान) से ‘द ट्रिब्यून’ का प्रकाशन शुरू किया। विभाजन के बाद लाहौर से शिमला व अंबाला होते हुए यह समाचार पत्र अब चंडीगढ़ से प्रकाशित हो रहा है।
‘द ट्रिब्यून’ के सहयोगी प्रकाशनों के रूप में 15 अगस्त, 1978 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दैनिक ट्रिब्यून व पंजाबी ट्रिब्यून की शुरुआत हुई। द ट्रिब्यून प्रकाशन समूह का संचालन एक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।
हमें दूरदर्शी ट्रस्टियों डॉ. तुलसीदास (प्रेसीडेंट), न्यायमूर्ति डी. के. महाजन, लेफ्टिनेंट जनरल पी. एस. ज्ञानी, एच. आर. भाटिया, डॉ. एम. एस. रंधावा तथा तत्कालीन प्रधान संपादक प्रेम भाटिया का भावपूर्ण स्मरण करना जरूरी लगता है, जिनके प्रयासों से दैनिक ट्रिब्यून अस्तित्व में आया।
