नेपाल बाढ़ 2026 : फिर पानी के सैलाब की चेतावनी,1500 से ज्यादा लापता ,संख्या और बढ़ेगी
इंडिया प्राइम टीवी इंटरनेशनल डेस्क नई दिल्ली । नेपाल बाढ़ 2026 । नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने नेपाल के पहाड़ी इलाकों में भारी तबाही मचा दी है। 28 अगस्त 2026 तक सामने आए आंकड़ों के मुताबिक नेपाल में 469 लोगों की मौत हो चुकी है और 977 लोग अब भी लापता हैं। चीन के तिब्बत क्षेत्र के Gyirong County में तीन मौतों के साथ 558 लोग लापता बताए गए हैं। दोनों देशों को मिलाकर 1,500 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं। नेपाल में 3,200 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है और बचाव अभियान लगातार जारी है।
नेपाल बाढ़ 2026: फिर पानी के सैलाब की चेतावनी
भारत के 288 नागरिक अब भी संपर्क से बाहर
इस आपदा में भारत की चिंता भी बढ़ गई है। विदेश मंत्रालय के अनुसार 288 भारतीय नागरिक नेपाल में अब भी संपर्क से बाहर हैं। इनमें 73 लोग एक जलविद्युत परियोजना में काम कर रहे थे, जबकि बड़ी संख्या में भारतीय कैलाश मानसरोवर यात्रा पर थे। नेपाल में फंसे भारतीयों के लिए भारत सरकार ने विशेष नियंत्रण कक्ष बनाया है और नेपाल सरकार के साथ लगातार संपर्क किया जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार चीन की तरफ भी करीब 200 भारतीय तीर्थयात्री फंसे हुए हैं।
भारतीय नागरिकों के अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, यूक्रेन, कनाडा, दक्षिण कोरिया और जापान समेत 30 से ज्यादा देशों के नागरिकों के भी संपर्क से बाहर होने की जानकारी सामने आई है। AP के अनुसार नेपाल और तिब्बत में लापता लोगों में बड़ी संख्या पर्यटकों, trekkers, तीर्थयात्रियों और infrastructure projects में काम करने वाले लोगों की है।
MEA के विवरण के अनुसार:
| समूह | संख्या |
|---|---|
| Trishuli-1 Power Project पर काम कर रहे भारतीय | 73 |
| Tamil Nadu का समूह | 37 |
| Tamil Nadu का दूसरा समूह | 49 |
| West Bengal का समूह | 32 |
| Kerala का समूह | 33 |
| अन्य राज्यों के भारतीय | 61 |
ये आंकड़े अलग-अलग समूहों की reported/uncontactable संख्या हैं; इन्हें सीधे “राज्यवार कुल लापता” समझना सही नहीं होगा, क्योंकि कुछ समूहों की स्थिति बाद में बदल सकती है।

तबाही का केंद्र Rasuwa, जहां करीब 46,689 लोग रहते हैं
बाढ़ का सबसे ज्यादा असर नेपाल के Rasuwa जिले में हुआ है। 2021 की नेपाल जनगणना के अनुसार Rasuwa की कुल आबादी 46,689 थी। यह बेहद पहाड़ी और कम घनत्व वाला जिला है, जहां प्रति वर्ग किलोमीटर करीब 30 लोग रहते हैं। जिले की आबादी का बड़ा हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों में रहता है।
Rasuwa की अहमियत केवल इसकी आबादी से नहीं है। यह नेपाल-चीन सीमा, Langtang क्षेत्र, Gosainkunda, trekking routes, Kailash-Mansarovar यात्रा से जुड़े मार्ग और hydropower projects के कारण रणनीतिक और आर्थिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण इलाका है। Timure, Syabrubesi और Rasuwagadhi इस आपदा से सबसे ज्यादा प्रभावित प्रमुख स्थानों में हैं।
Timure और Rasuwagadhi क्यों हैं इतने महत्वपूर्ण?
Timure नेपाल-चीन सीमा के नजदीक स्थित महत्वपूर्ण settlement है, जबकि Rasuwagadhi नेपाल और चीन के बीच व्यापार तथा आवागमन के प्रमुख border corridors में से एक है। यहां से चीन के Tibet क्षेत्र के साथ cross-border trade चलता है। बाढ़ ने इस क्षेत्र की सड़कों, पुलों, border infrastructure और संपर्क व्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचाया है।
यही इलाका पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के लिए भी महत्वपूर्ण है। Langtang और Gosainkunda की ओर जाने वाले यात्रियों के साथ-साथ Tibet और Kailash-Mansarovar जाने वाले यात्रियों की आवाजाही भी इस व्यापक corridor से जुड़ती है। इसलिए यहां सामान्य समय में मौजूद लोगों की संख्या केवल स्थानीय आबादी से नहीं आंकी जा सकती।
Rasuwa में कितने पर्यटक आते हैं?
उपलब्ध सबसे हालिया पर्यटन आंकड़े बताते हैं कि Rasuwa के Gosainkunda और Langtang क्षेत्रों में जुलाई 2024 से जून 2025 के 11 महीनों के दौरान 42,230 से ज्यादा पर्यटक पहुंचे थे। इनमें 30,750 नेपाली और 11,480 विदेशी पर्यटक थे। पिछले वित्तीय वर्ष में यह संख्या 32,597 थी।
इसका मतलब यह है कि यह क्षेत्र वर्षभर एक महत्वपूर्ण tourist destination बना रहता है। हालांकि अगस्त 2026 के किसी खास दिन Rasuwa, Timure या Syabrubesi में कितने पर्यटक मौजूद थे, इसका आधिकारिक दैनिक आंकड़ा अभी उपलब्ध नहीं है। इसलिए यह कहना कि बाढ़ के दिन वहां “इतने हजार पर्यटक मौजूद थे”, उपलब्ध सरकारी आंकड़ों से साबित नहीं किया जा सकता।
लेकिन बाढ़ के शुरुआती सरकारी आकलन ने बाहरी लोगों की मौजूदगी की गंभीर तस्वीर जरूर दिखाई थी। नेपाल Tourism Board ने शुरुआती चरण में सैकड़ों पर्यटकों और trekkers के संपर्क से बाहर होने की सूचना दी थी। बाद के समेकित आंकड़ों में स्थानीय निवासी, पर्यटक, सुरक्षा बल और infrastructure workers सभी को शामिल किया गया।
Langtang National Park इस क्षेत्र का बड़ा पर्यटन केंद्र
Rasuwa का बड़ा हिस्सा Langtang National Park से जुड़ा है। नेपाल Tourism Board के अनुसार यह National Park Rasuwa के अलावा Nuwakot और Sindhupalchok तक फैला हुआ है और इसका क्षेत्रफल करीब 1,710 वर्ग किलोमीटर है। Langtang range, glaciers, lakes, Himalayan landscapes और trekking routes इसे नेपाल के प्रमुख mountain tourism destinations में शामिल करते हैं।
जुलाई 2025 से जून 2026 के दौरान Langtang National Park में करीब 56,000 visitors पहुंचने की जानकारी सामने आई थी। उपलब्ध अंतरिम आंकड़ों में करीब 50,360 visitors दर्ज किए गए थे, जिनमें 39,011 domestic visitors, 788 SAARC visitors और 10,561 अन्य विदेशी पर्यटक थे। ये आंकड़े पूरे protected area के हैं, इसलिए इन्हें केवल बाढ़ प्रभावित Timure या Syabrubesi की आबादी नहीं माना जा सकता।

Nuwakot भी प्रभावित, लेकिन तस्वीर अलग
बाढ़ का असर Rasuwa से नीचे की ओर Nuwakot और Trishuli नदी क्षेत्र तक भी पहुंचा। 2021 जनगणना के मुताबिक Nuwakot जिले की आबादी 2,63,391 थी।
Nuwakot में Trishuli नदी के आसपास के settlements, roads और hydropower infrastructure प्रभावित हुए हैं। यहां का भूगोल Rasuwa से अलग है—Rasuwa मुख्यतः high Himalayan border district है, जबकि Nuwakot अपेक्षाकृत अधिक आबादी वाला जिला है और Kathmandu Valley से connectivity के कारण आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है।
Power projects पर भी भारी असर
इस आपदा ने नेपाल के hydropower sector को भी बड़ा झटका दिया है। शुरुआती आकलनों के मुताबिक Rasuwa और Nuwakot में 13 hydropower projects और एक solar project प्रभावित हुए हैं, जबकि लगभग 359 MW की generation capacity प्रभावित होने की बात सामने आई है। कई परियोजनाएं operational थीं और कुछ निर्माणाधीन थीं।
इनमें सबसे ज्यादा चर्चा 216 MW Upper Trishuli-1 Hydropower Project की है। यह परियोजना करीब 647 million डॉलर की लागत वाली है और दक्षिण कोरियाई कंपनियों की प्रमुख भागीदारी के साथ बनाई जा रही थी। बाढ़ में परियोजना के upper dam का 90 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा और करीब 90 प्रतिशत construction workers का base camp नष्ट होने की रिपोर्ट सामने आई है। दुर्घटना से पहले परियोजना करीब 84 प्रतिशत पूरी हो चुकी थी।
Upper Trishuli-1 को Korea South-East Power और Doosan Enerbility के नेतृत्व वाले consortium से जोड़ा गया है। परियोजना की financing में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं की भी भूमिका है। यानी इसे केवल “कोरिया की परियोजना” कहना भी पूरी तस्वीर नहीं होगी।
चीन से जुड़ी परियोजनाएं भी प्रभावित
बाढ़ से प्रभावित hydropower infrastructure में चीन की वित्तीय भूमिका वाली परियोजनाएं भी शामिल हैं। उदाहरण के तौर पर Upper Trishuli-3A, जिसकी क्षमता 60 MW है, को China Export-Import Bank की concessional financing से बनाया गया था। इसलिए इस आपदा में नेपाल की hydropower infrastructure पर दक्षिण कोरिया, चीन और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं से जुड़े अलग-अलग projects का असर पड़ा है।
यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि किसी परियोजना में किसी देश की कंपनी या बैंक की भागीदारी का अर्थ यह नहीं है कि उस देश की वजह से बाढ़ आई। उपलब्ध वैज्ञानिक आकलन बाढ़ को प्राकृतिक भूगर्भीय और ग्लेशियल घटना से जोड़ते हैं।
क्या चीन ने पानी छोड़ा था?
फिलहाल उपलब्ध वैज्ञानिक और प्रशासनिक जानकारी के आधार पर चीन द्वारा जानबूझकर पानी छोड़े जाने का कोई प्रमाण नहीं मिला है। शुरुआती वैज्ञानिक विश्लेषण में Tibet की ओर ice-rock/bedrock collapse और उससे पैदा हुए debris flow को बाढ़ का मुख्य trigger माना गया है। इस घटना ने नदी में अचानक भारी मात्रा में पानी, बर्फ और मलबा पहुंचाया, जिससे Bhote Koshi नदी में विनाशकारी flash flood पैदा हुई।
लेकिन खतरा अभी खत्म नहीं हुआ—दूसरी बाढ़ की आशंका
बाढ़ के बाद नदी में जमा मलबे ने एक नया खतरा पैदा कर दिया है। चीन के जल संसाधन अधिकारियों के अनुसार एक newly formed barrier lake में करीब 20 लाख cubic metres पानी जमा है और आने वाले दिनों में करीब 30 लाख cubic metres अतिरिक्त पानी पहुंच सकता है।
अगर इस प्राकृतिक debris barrier में दरार बढ़ती है या यह टूट जाता है, तो अचानक दूसरी flash flood आ सकती है। यही वजह है कि प्रशासन ने नदी के निचले हिस्सों और जोखिम वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने तथा जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा है। नेपाल में अब rescue operation के साथ-साथ संभावित दूसरी बाढ़ पर भी नजर रखी जा रही है।
भारत पर दोहरा असर—नागरिक भी संकट में और बिजली भी
नेपाल की इस आपदा का असर भारत पर दो स्तरों पर पड़ रहा है। पहला असर भारतीय नागरिकों की सुरक्षा का है, क्योंकि 288 भारतीय नागरिक नेपाल में संपर्क से बाहर बताए गए हैं और करीब 200 भारतीयों के चीन की तरफ फंसे होने की रिपोर्ट है। दूसरा असर बिजली supply का है।
नेपाल से भारत को मिलने वाली बिजली बाढ़ के कारण प्रभावित हुई है। रिपोर्टों के अनुसार नेपाल की भारत को बिजली supply करीब 800 MW से घटकर लगभग 400 MW रह गई। बाढ़ से प्रभावित infrastructure में भारत को बिजली देने वाली hydropower facilities भी शामिल हैं।
इसका असर केवल बिजली व्यापार पर नहीं है। नेपाल की hydropower economy का बड़ा हिस्सा भविष्य में भारत और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों को बिजली बेचने की योजना से जुड़ा है। इसलिए बड़े projects को हुआ नुकसान नेपाल के export revenue और regional power trade दोनों के लिए झटका है।
भारत में भी निगरानी बढ़ी
नेपाल से निकलने वाली नदियों के कारण भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में भी निगरानी बढ़ाई गई है। खास तौर पर Gandak/Narayani river system को लेकर प्रशासन सतर्क है। हालांकि उपलब्ध ताजा भारतीय अधिकारियों के आकलन में अभी तक भारतीय क्षेत्र में इस flash flood का उसी स्तर का प्रतिकूल प्रभाव दर्ज नहीं हुआ है जैसा नेपाल के प्रभावित पहाड़ी इलाकों में हुआ है।
राहत और बचाव में भारत समेत कई देशों की मदद
भारत ने नेपाल के लिए मानवीय सहायता भेजी है और अपने नागरिकों की निकासी के लिए नेपाल सरकार के साथ coordination बढ़ाया है। दक्षिण कोरिया समेत कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने भी नेपाल को राहत और बचाव सहायता देने की घोषणा की है। भारत की ओर से राहत सामग्री भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई है।
फिलहाल नेपाल के सामने तीन बड़ी चुनौतियां
इस समय नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों को तलाशना, दूसरी चुनौती दूसरी संभावित flash flood से लोगों को बचाना और तीसरी चुनौती टूटे हुए roads, bridges और hydropower infrastructure के बीच राहत पहुंचाना है।
Rasuwa की करीब 46,689 की स्थानीय आबादी के अलावा इस क्षेत्र की पर्यटन अर्थव्यवस्था के कारण यहां नियमित रूप से देश-विदेश से लोग पहुंचते हैं। हालिया पर्यटन आंकड़े बताते हैं कि Langtang-Gosainkunda क्षेत्र में सालाना हजारों नेपाली और विदेशी पर्यटक आते हैं। इसी वजह से इस आपदा में स्थानीय निवासियों के साथ tourists, trekkers, pilgrims, security personnel और hydropower workers की बड़ी संख्या प्रभावित हुई है।
निष्कर्ष
28 अगस्त 2026 तक उपलब्ध तस्वीर यह है कि नेपाल में 469 लोगों की मौत, 977 लोगों के लापता होने और तिब्बत में 558 लोगों के लापता होने से यह आपदा एक बड़े मानवीय संकट में बदल चुकी है। 288 भारतीय नेपाल में संपर्क से बाहर हैं, जबकि चीन की तरफ भी करीब 200 भारतीयों के फंसे होने की रिपोर्ट है।
Rasuwa की लगभग 46.7 हजार की स्थानीय आबादी वाले इस सीमावर्ती जिले में पर्यटन, तीर्थयात्रा, China-Nepal trade और hydropower infrastructure एक साथ मौजूद हैं, इसलिए बाढ़ का नुकसान केवल जान-माल तक सीमित नहीं है। अब सबसे बड़ा खतरा उस प्राकृतिक barrier lake से है, जिसमें पानी लगातार बढ़ रहा है और जिसके टूटने पर दूसरी flash flood की आशंका बनी हुई है।
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